Saturday, May 11, 2013

सर्वप्रथम क्या देश या धर्म ?

                            उठो देशवासियों रणभेरी बज चुकी, मात्र-भूमि की पुकार है,
                                जो अब भी ना जागे तो तुम्हारे जीवन पर धिक्कार है।
                                रहे चुप तुम कई वर्शों तक अब तोड़ो दास्तां की बेड़ीयाँ,
                          करो भारत माता को सर्वस्व समर्पित यह तुमहारा अधिकार है।

जी हां आज हम एैसे इसलिए कह रहे है क्योंकि देश में आज कुछ एैसे कट्टरपंथी अपना पांव पसार रहें है जो राश्ट्र की एकता और अखंडता को धराशायी करना चाहते है। बात चाहे आज संसद में राष्ट्रगीत की अपमान का हो या फिर फतवे के मार्फत धर्म के नाम पर देश को बांटने की, हर ओर आज एक ही सवाल हर हिन्दुस्तानी पुछ रहा है की सर्वप्रथम क्या देश या धर्म। कुछ कट्टरपंथी तो ये भी मानते है की देश सीमाओं में बंधा हो सकता है मगर धर्म को कोई सीमा नही बांध सकती मगर देश से ही धर्म की सुरूआत होती है ये बात ये भूल जाते है। सवाल ये भी पैदा होता है की उनके लिए सर्वप्रथ देश पहले है या उनका धर्म। भारत एक ऐसा देश है जो सभी धर्मो का सम्मान करता है, इसलिए यहा बात देश की होती है फिर हम देश का सम्मान क्यों नही कर पाते आज ये एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, जो देश और समाज को तोड़ने की दिषा चल रहे इस्लामिक सड्यंत्र का हिस्सा है। आज जाकिर और ओवैषी जैसे धार्मिक उन्माद फैलाने वाले लोग धर्म के सम्मान में देशको आड़े लाते है, और धर्म को देश से उपर बताते है। 


आज अल्पसंख्यक वोट बैक इस कदर महत्वपूर्ण हो गया है कि हमारे नेता देश और संस्कृति की चिन्तन को स्वयं ही नष्ट करनें की दिषा में हर समय अपना दुष्चक्र चलाने पर अमादा हैं। यहा सवाल उठता है कि क्या आज के सेकुलवादी युग में अल्पसंख्यक समुदाय अपने आप को देश से उपर समझने लगा है। क्या आज बंदे मातरत का विरोध और हिन्दु देवा देवताओं के अपमान से ही हमारे देश के अल्पसंख्यक समुदाय अपने आप को सुरक्षित रख पाएगा या फिर देश के अंदर इस्लामिक कट्टरता को बढ़ावा देकर, ये एक महत्पूर्ण सवाल आज के संदर्भ में हर ओर लोग इस समुदाय से पूछ रहे है।

इस भारतभूमी की रक्षा का इतिहास हमेशा से ही भारत मां के चरणों में शीश झुकाने और सरहदों पर शहीद होने वाले जवांजों ने की है, एैसे में सर्वप्रथम हर हिन्दुस्तानी के अंदर पहले राष्ट्र सर्वप्रथम की भावना हमेशा रहती है। देश की सनातन वैदिक के अनुसार राष्ट्र की रक्षा करना पहला कर्तव्य है और राष्ट्र क्या है उसको भी धर्म परिभाषित करता है। एैसे में सवाल उन मजहवी उन्माद फैलाने वाले इस्लाम के ठेकेदारों से है की आखिर किस मकसद से धर्म को राष्ट्र से उपर बताते है। इसलिए आज हम पुछ रहें है की सर्वप्रथ क्या देश या धर्म ?

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