Saturday, May 18, 2013

क्या भारतीय व्यापारियों को खत्म किया जा रहा है ?

महाराष्ट्र के व्यापारी एक बार फिर से सड़को पर है, महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों द्वारा व्यापारियों पर लगाए जा रहे कर एलबीटी, को लेकर व्यापररियों में विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। लगता है एफडीआई के बाद अब सरकार एलबीटी कर लागू करके वहा के व्यापारियों को समाप्त करना चाहती है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित महाराष्ट्र के अन्य शहरों में एलबीटी के विरोध में चल रही हड़ताल के कारण अब तक 75,000 करोड़ रुपयों के नुकसान हुआ है। ये नुकसान सिर्फ सरकारी राजस्व का ही नहीं हो रहा है, इसमे तमाम एैसे छोटे बड़े व्यपारियों का कमर टूट रहा है जो लगातार इसके बिरोध में पीछले कई दिनों से अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे है।


व्यापारियों के विरोध के बावजूद सरकार अभी तक झुकने को तैयार नहीं है। राज्य के दोनों सत्तारूढ़ दल कांग्रेस व राकांपा इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। अब तक राज्य के 19 नगरपालिका क्षेत्रों में एलबीटी लागू की जा चुकी है। मुंबई में इसे एक अक्टूबर से लागू किया जाना है। एक महानगर में पहले सरकार एफडीआई की अनुमति देती है और फिर उसके बाद अब एलबीटी जैसे कर लागू करके उनके रोजी रोटी को मारना चाहती है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या ये कर सरकार विदेशी व्यापारियों के दबाव में लागू कर रही है, जो हमेषा से ही छोटे भारतीयें व्यापारियों के लिए तरह तरह के साजि़ष करते रहते है। 

मुंबई सहित राज्य के कई हिस्सों में चल रहे बंद के कारण आम आदमी को जरूरी सामानों की किल्लत होने लगी है। लोकल बॉडी टैक्स का ये मामला दिनों दिन गहराता ही जा रहा है। एलबीटी को लेकर महाराष्ट्र सरकार और फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र के बीच जारी टकराव की स्थिति उतपन्न हो गई है। इस पुरे घटनाक्रम पर अब सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी-शिवसेना और एमएनएस के बाद अब एनसीपी भी व्यापारियों के समर्थन में उतर आई है।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक आक्ट्राई है और यहां हर चीज पर सबसे अधिक टैक्स देना पड़ता है। अगर अभी एलबीटी पूरी तरह से लागू की जाती है तो इससे हर जिस अन्य शहरों के मुकाबले जयादा दाम पर मिलेगी। अगर आप एक कार खरीदते हैं, और ये कार दिल्ली मे यदि पांच लाख में मिलेगी तो वही कार आपको मुम्बई में पांच लाख पचपन हजार में मिलेगी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर एक देश में इतना अन्तर क्यों ? यह व्यवस्था व्यापारीयों पर सरकार जबरन थोपना चाहती है, ताकी विदेशी व्यापारियों को लूट की खुली छूट दी जा सके और वालमार्ट जैसे विदेशी व्यापारी आसानी से अपना पांव पसार सके। 

हर व्यापार मे कभी न बिकनेवाला भी माल होता है जिसे डेड स्टॉक के नाम से जाना जाता है, एल बी टी जैसे कर मे इसका कोई व्यवस्था नहीं किया गया है, इससे व्यापारियों को कर के नाम पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। सरकार की ओर से सेट ऑफ का कोई जिक्र नहीं है जिससे जितना माल बिके केवल उसी के उपर टैक्स भरा जाए। इसको लेकर व्यापारियों में काफी जयादा आक्रोष का माहौल बना हुआ है , और सरकार हाथ पर हाथ धरे चुप चाप तमाशा देख रही है। तो एैसे में सवाल खड़ा होता है की क्या वालमार्ट और एफडीआई के लिए भारतीय व्यापारियों को खत्म किया जा रहा है?

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