Saturday, June 8, 2013

नरेद्र मोदी का विरोध आखिर क्यों ?

मोदी ही हमारे प्रधान मंत्री पद के लिए नेता है, इस बात को कहने में आखिर बीजेपी क्यों हिचक क्यों रही है। ये सवाल आज हर वो पार्टी कैडर पुछ रहा है। अब बीजेपी के पास ऐसा कोई मौका भी नहीं गया है, ताकी वह कह सके की मोदी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नहीं होंगे। दरअसल बीजेपी में मोदी का कोई विरोध नहीं है। ये आने वाले दिनों में और साफ हो जाएगा और कुछ हद तक हो भी चुका है। जिस प्रकार से मोदी को प्रधान मंत्री पद की उमीदवार बनाने के लिए पीम पीम की नारों की गुंज हर ओर आज सुनाई दे रही है उससे लगता है की मोदी ही बीजेपी हैं और बीजेपी मोदी। तो यहा सवाल खड़ा होता है की एैसे में फिर नरेन्द्र मोदी का विरोध क्यों? मोदी आज की तारीख में देश के सबसे चर्चित व्यक्ति हैं। ये भी किसी से छुपा नहीं है। मोदी के मॉडल में नया मध्यमवर्ग है, शहरी मतदाता है, और चकाचैंध भी है। साथ ही मोदी के मॉडल हिंदुस्तान की आत्मा के कहीं अधिक करीब दिखती है। 

वही अगर नरेन्द्र मोदी की धुर विरोधी नीतीश कुमार की बात करे तो नीतीश बिहार से आते हैं और उनका वोट बैक अल्पसंख्यक वर्ग है, जो कभी लालू यादव के जिताउ सर्मथकों में से था। एैसे में अपनी जमीन बचाने के लिए नीतीश कुमार कांग्रेस का हाथ थाम सकते है। मगर यहां कांग्रेस का वजूद लगभग खत्म है। नीतीश को समर्थन देने पर कांग्रेस सैकुलरवाद के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता देने का नाटक भी कर सकती है। हालांकि तीसरे मोर्चे की नौबत आने पर नीतीश को मुलायम सिंह यादव से चुनौती मिलेगी। एैसे में मोदी का ये विरोध नीतीश कुमार के आने वाले दिनों में और मुषीबते बढ़ा सकती है। वही एनडीए की घटक दल शिवसेना मराठी हिंदू वोटरों की राजनीति करती रही है। मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में शिवसेना खुद को हिंदुत्व की सबसे बड़ी पैरोकार के तौर पर पेश करती रही है। ऐसे में छवियों का टकराव शिवेसना और मोदी के बीच तल्खी की एक वजह बताया जा रहा है।


मोदी की अगुवाई में अगर बीजेपी 180 के आंकडे तक भी पहुंचती है तो नये सहयोगी साथ आ खडे हो सकते है। और मोदी को लेकर फिलहाल राजनाथ गोवा अधिवेशन में इसी बिसात को बिछाना चाहते है जिससे संकेत यही जाये कि मोदी के विरोधी राजनीतिक दलो की अपनी मजबूरी चुनाव लडने के लिये हो सकती है लेकिन चुनाव के बाद अगर बीजेपी सत्ता तक पहुंचने की स्तिति में आती है तो सभी बीजेपी के साथ खड़े होगें ही। साथ ही मोदी बेहद दृढ संकल्प व्यक्ति है और जिस चीज को ठान लेते है उसे पूरा करके ही दम लेते है। यही सब कारण है की मोदी हिंदुत्व अस्मिता के पहचान बन चुके है और मोदी को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में लोग देख रहे है। तो एैसे में सवाल खड़ा होता है की फिर नरेद्र मोदी का विरोध आखिर क्यों ?

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