Saturday, November 2, 2013

सोमनाथ की जमीन पर सरकारी कॉलोनी कितना सही ?

एक ओर जहां गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमनाथ मंदिर के बहाने सरदार पटेल को राष्ट्रवादी बताकर उनके सम्मान में 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' बनवा रहे हैं वहीं दूसरी ओर उन्हीं की सरकार उन्हीं सरदार द्वारा सोमनाथ मंदिर को 999 साल के लीज पर दी गई जमीन का एक हिस्सा वापस मांग रही है। जहां मोदी सरकार अब सरकारी कर्मचारियों के दफ्तर और आवासीय कालोनी बनाना चाहती है।

1957 में सोमनाथ ट्रस्ट को 999 सालों से जो जमीन लीज पर दी गई थी अब मोदी सरकार ने 15 अगस्त 2013 को नये जिले गीर-सोमनाथ की घोषणा के बाद 24 हेक्टेयर जमीन वापिस लेने का फरमान जारी कर दिया है। गीर-सोमनाथ के कलेक्टर सीपी पटेल ने सोमनाथ ट्रस्ट के सचिव पी.के लहरी को 8 अक्टूबर 2013 को एक पत्र लिखकर 24 हेक्टयर जमीन वापिस लेने की मांग की है।

गौरतलब है कि सरदार पटेल ने गुजरात को दो अनमोल भेंट दी थी, पहला जूनागढ़ राज्य जिसका विलय गुजरात में किया गया और दूसरा सोमनाथ का जीर्णोद्धार. जूनागढ़ को भारत में मिलाने के बाद जब वे सोमनाथ मंदिर  दर्शन करने गए थे तब उनके साथ मंत्रिमंडल के सदस्य वी.एन.गाडगिल भी थे. सरदार पटेल ने जिस प्राचीन सोमनाथ मंदिर का गौरव वापिस दिलाने के लिए मंदिर के पुनर्निमाण का संकल्प किया था और सोमनाथ ट्र्स्ट बनाकर खर्च के लिए शामलदास गांधी आदि लोगों की भागीदारी से फंड की व्यवस्था करने की घोषणा की थी और सरकार की ओर से कोई भी विरोध ना करने का भरोसा दिलाया था. तब तीन साल में कन्हैयालाल मुंशी की निगरानी में भव्य सोमनाथ मंदिर का निर्माण कार्य हुआ था.

उल्लेखनीय है कि मोदी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नए जिले गीर-सोमनाथ की घोषणा तो कर दी लेकिन इस जिले का कामकाज वेरावल के डिप्टी कलेक्टर कार्यालय से किया जाता रहा है। ऐसे में वेरावल के कलेक्टर सीपी पटेल ने अपने पत्र क्रमांक नं. 10/2013 में बताया है कि गीर-सोमनाथ जिले के लिए पुलिस जिला सेवा सदन, बहुमंजिला इमारत, स्टाफ क्वाटर, पार्किंग, अन्य सुविधाओं, गार्डनिंग, जिला खेल कूद भवन, नगरपालिका कार्यालय, टाउन हॉल, आफिसर्स बिल्डिंग आदि का निर्माण करना है, उसके लिए सरकारी खाली जगह नहीं है इसीलिए सोमनाथ ट्रस्ट की जमीन के लीज को खारिज करके ट्रस्ट से जमीन को वापस मांग रही है।

ताज्जुब तो इस बात का है कि सोमनाथ ट्र्स्ट के प्रमुख लालकृष्ण अडवानी और सोमनाथ के प्रमुख केशूभाई पटेल इस बात पर मौन हैं। भाजपा के नेता भले ही इस मसले पर चुप हों लेकिन इस मुद्दे को गुजरात कांग्रेस के भूतपूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ पटेल ने उठाया है।

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