Sunday, December 1, 2013

क्या बांग्लादेशी घुसपैठिए देश में राजनीतिक और सामाजिक समस्या बन गये हैं ?

देश में बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ और असम समझौता लागू नहीं होने के कारण ये घुसपैठीए राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक कारण बनते जा रहा है। लालकृष्ण अडवाणी ने अपने एक बयान में दावा किया था कि दिल्ली में नौ लाख से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिये मौजूद हैं। आज केन्द्र सरकार हो या फिर दिल्ली सरकार हर जगह वोट बैंक की राजनीति हाबी है। असम के प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक दल असम गण परिषद का कहना है कि 1985 के असम समझौता लागू नहीं होने से राज्य में टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। समझौते में असम की सीमा सील करने और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस उनके देश भेजने का प्रावधान था।

उच्चतम न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में निर्णय दिया था कि देश के हर थाने में बांग्लादेशी प्रकोष्ठ बनाया जाये जिसमें बंगलादेशी घुसपैठियों की धरपकड़ और समीक्षा कर उसकी जानकारी अदालत को निर्धारित रूप से दी जाये। मगर आज तक इसके उपर किसी ने कोई अमल नहीं किया। दिल्ली में बांग्लादेश से चोरी छिपे आने और अपराध करने की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है। आज लाखों की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए जेहादी गुटों से मिल कर देश में आतंक फैला रहे हैं । देश की राजनीतिक पार्टियां इस समस्या की जगह चुनावी लाभ लेने में कहीं जयादा सहज मसषुष कर रही है। जबकी देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के साथ साथ सांस्कृतिक पतन का कारण बनते जा रहे हैं । ये घुसपैठीए देश को इस्लामीक सड्यंत्र के तहद तोड़ने की लगातार साजिस रच रहे हैं।

कुछ साल पहले तक असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई असम में अवैध बांग्लादेशियों के अस्तित्व से ही इन्कार करते थे। यही स्थिति सीपीएम की है। कुछ साल पहले तक पश्चिम बंगाल सरकार ही इन बांग्लादेशियों को राशनकार्ड आदि मुहैया करवाती थी। दिल्ली में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ.दामिनी लाऊ ने जनवरी 2012 में अपने एक निर्णय में सरकार को फटकार लगाई थी। डॉ.दामिनी ने कहा था कि बांग्लादेशी वे सुविधाएं ले रहे हैं जो भारतीय नागरिकों को मिलनी चाहिए। 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संघर्ष में भारत की अहम भूमिका रही थी। लेकिन आज भारत इस कदर कूटनीतिक चुप्पी साधे बैठा है मानो उसके पूर्व में कोई देश हीं नहीं है।

मेघालय के गारो पर्वतीय जिला में गारो जनजाति समाज और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों में हिंसक झड़पें आए दिन हो रही है। जिसके चलते वहां की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था पुरी तरह से प्रभावित हो रही है। तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या बांग्लादेशी घुसपैठिए देश के लिए राजनीतिक, समाजिक, और सास्कृतिक समस्या का कारण बन गये हैं ?

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