Saturday, December 14, 2013

सोनिया गांधी को राष्ट्रमाता का दर्जा देना कितना सही ?

देश में चाटुकारीता की राजनीति किस हद तक जा सकती है इसे विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने दुनिया के सामने लाखड़ा किया है। मणिशंकर अय्यर ने जब सोनिया को प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में विकल्प बताया तो, चाटुकार नेता भला कहा चुप बैठने वाले थे। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने दो कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि सोनिया गांधी सिर्फ राहुल गांधी की माँ नहीं हैं, वे हमारी भी माँ  हैं और पूरे देश की माँ हैं।

विधानसभा चुनावों में हुई हार को लेकर कांग्रेसी नेताओं को कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। ऐसे में ये नेता चापलूसी कर खुद को मेहरबान और गांधी नेहरू परिवार के आगे  अपने आप को शरणागत करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। खुर्शीद के बयानों से कई अहम सवाल खड़े हो रहे है कि क्या राजनीतिक दलों के लिए व्यक्ति विशेष की महत्वता इतनी बढ़ गई है कि भारत माता की जगह सोनिया गांधी में देश की माँ दिखाई देने लगी है। क्या ये राष्ट्र का अपमान नहीं है? जिस देश में गाय और गंगा को माँ का दर्जा दिया जाता है, वहां आज नेताओं को सोनिया गांधी दिखाई देने लगी है। 

सवाल ये भी उठता है कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता बताने के बाद अब कांग्रेस पार्टी राष्ट्रमाता की घोषणा करने की योजना बना रही है या फिर  सिर्फ ये अपनी राजनीति चमकाने की चाटुकारीता ? आपातकाल के दिनों में इंदिरा गाँधी को भी माँ कहा गया था और वह इंदिरा के पतन का कारण बना। अब सोनिया को माँ कह कर क्या कांग्रेस पार्टी अपने उस पतन की ओर बढ़ रही है। जिसे देख कर 10 जनपथ आजतक नहीं उबर पाया है? सोनिया गांधी को लेकर चापलुसी का ये कोई पहला मामला नहीं है। 

आये दिन सोनिया के सम्मान में इस तरह की बाते सामने आते रहती है। हाल ही में उत्तराखंड के गवर्नर नियुक्त किए गए अजीज कुरैशी के एक बेबाक बयान ने बवाल मचा दिया था। कुरैशी ने कहा था कि मेरे लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहने और गांधी परिवार के प्रति प्रतिबद्धता और वफादारी का ही नतीजा है कि मुझे गवर्नर का पद मिला। मैं सोनिया गांधी के आशीर्वाद की वजह से उत्तराखंड का गवर्नर बन सका। 

संवैधानीक पदों पर बैठने वाला पहरेदार जब व्यक्ति विशेष की वफादारी करने लगे तो सवाल और भी गंभीर हो जाता है। सियासी बिसात को बदलने के लिये बेचैन कांग्रेस के सिपहसलार सोनिया को माँ बता कर प्रेरित करने जुटे हुए है। ये जताने की कोशिश में लगे है कि 2014 में सत्ता माँ के आसरे ही हासिल हो सकती है। तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि सोनिया गांधी को राष्ट्रमाता का दर्जा देना कितना सही ?

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